ननंद ने अपनी भाभी को फोन किया और पूछा,भाभी मैंने राखी भेजी थी मिल गयी आप लोगों को
???
भाभी : नहीं दीदी, अभी नहीं मिली.
ननद : भाभी कल तक देख लो अगर नहीं मिली तो मैं खुद आऊंगी राखी लेकर, अगले दिन भाभी ने खुद फोन किया : दीदी आपकी राखी नहीं मिली.
ननद ने फोन रखा और चल दी और राखियां, मिठाई लेकर, मायके पहुंची, राखी बांधी, सबसे मिली, खूब बातें, हंसी मजाक हुए, चलने लगी तो भाभी ने खूब सारा सामान रख दिया।
माँ से विदा ली तो माँ ने शिकायत के लहजे में कहा-मेरा ख्याल नहीं करती, जल्दी आया कर, ननद बोली- उधर भी तो माँ हैं और इधर भाभी तो हैं आपके पास आँखों में आंसू लेकर माँ बोली- सचमुच बहुत ख्याल करती है मेरा, तुझे बुलाने के लिए तुझसे .झूठ. भी बोला, तेरी राखी तो पहले ही आ गयी थी, लेकिन सबसे कह दिया कि कोई बताना मत, राखी बांधने के बहाने इस बार दीदी को बुलाना है, बहुत दिन से नहीं आयीं, ननंद रास्ते भर मायके की मीठी यादों में सिमटी कभी रोती तो कभी मुस्कराती हुई सोच रही थी.
ऐसी भाभी सब बहनों को मिले !!!"
मै भी यही सोचता हू..सभी परिवार ऐसे ही हंसते मुस्कराते रहे हमेशा....
कहानी कैसी लगी...अवश्य बतायै.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Commnet Here